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कर्नाटक: One State, Many Worlds

Friday, 10 June 2016

कर्नाटक:One State, Many Worlds
कर्नाटक का लिखित इतिहास लगभग 2000 वर्ष पुराना है।  कर्नाटक पर नन्द,मौर्य और सातवाहन राजाओ का शासन रहा। चौथी शताब्दी के मध्य से इस राज्य पर कदम्ब और गैंग राजवंशो का शासन रहा। श्रावनबेलगोला में जैन संत गोमतेश्वर की प्रतिमा गैंग वंश के एक राजा के मंत्री चामुंड राय ने बनवाई थी। बदामी के चालुक्य वंश(500 -735 ईस्वी )ने नर्मदा  से कावेरी तक के विशाल क्षेत्र पर राज्य किया। इस राजवंश ने बदामी,एहोल और पततदकल में अनेक सुन्दर इमारतों का निर्माण कराया। 753 से 973 ईस्वी तक कन्नड़ साहित्य का विकास हुआ। बहमनी के सुल्तानों और बीजापुर के आदिलशाही सुल्तानों ने यहाँ अनेक भवनों का निर्माण किया तथा उर्दू एवं फ़ारसी साहित्य को भी प्रोत्साहन दिया। ुरोपीय लोगो के आगमन से राज्य में नई फसलों की खेती होने लगी। पेशवा(1818 ईस्वी ) और टीपू सुल्तान (1799 ) की पराजय के बाद कर्नाटक ब्रिटिश शासन के अड़ीं हो गया।  19 वि शताब्दी में ईसाई मशीनरियों ने अंग्रेजी शिक्षा तथा छपाई का प्रसार किया। स्वतंत्रता आंदोलन के साथ साथ कर्नाटक के एकीकरण का आंदोलन भी चलने लगा। बेलगाँव कांग्रेस(1924 ) की अध्यक्ष्ता महात्मा गांधी ने की। स्वतंत्रता के पश्चात 1956 ईस्वी में नए एकीकृत मैसूर राज्य का गठन किया गया और 1973 ईस्वी में इसका नाम बदल कर कर्नाटक रखा गया।

परिचय :
राजधानी :बंगलुरु;
क्षेत्रफल :191791 वर्ग किमी;
जनसँख्या ;61130704 ;
लिंगानुपात :968 ;
जनसँख्या घनत्व :319 ;
दशकीय वृद्धि दर : 15.67 %;
साक्षरता :75.60 %;
कुल जिले :29 ;
मुख्य भाषा :कन्नड़ ;
विधानमंडल : द्विसदनीय ;
विधानसभा सदस्य :224 ;
विधान परिषद सदस्य :75 ;
लोकसभा सदस्य: 28 ;
राज्यसभा सदस्य :12 ;
प्रतिवयक्ति आय : 50676 रूपये। 

भूगोल:कर्नाटक गोवा और महाराष्ट्र के दक्षिण में ,आंध्र प्रदेश के पश्चिम में ,तमिल नाडु के उत्तर-पूर्व में और केरल के उत्तर में है। राज्य में लगभग 400 किमी लम्बा समुद्र तट है। राज्य में सबसे ऊँची चोटी मुलेयंगिरी है, जिसकी उचाई ६२१७ फुट है। इस राज्य के वनों में सागवान तथा चन्दन के पेड़ मिलते है। कर्नाटक की प्रमुख नदियां है-उत्तर में कृष्णा तथा उसकी सहायक नदियां (भीमा,घाटप्रभा ,मालप्रभा एवं तुंगभद्रा और वेदवंत ) तथा दक्षिण में कावेरी और उसकी सहायक नदियां - हेमवती,शिमशा,अर्कावती ,लक्ष्मण तीर्थ और कबिनो।
अर्थव्वस्था: यह मुख्य रूप से ग्रामीण और कृषि प्रधान राज्य है। इसकी 66% जनसँख्या ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है एवं 56 % श्रम शक्ति क्रषि और इससे सम्बंधित गतिविधियों में लिप्त है। यहाँ की नकदी फसले है-इलायची,सुपारी,नारियल ,मूंगफली,गन्ना और तम्बाकू। वनों से प्राप्त उत्पादों में चन्दन ,सागवान,रबड़ आदि प्रमुख है।
राज्य की कुल आय में उद्योगों का योगदान 20 % है। इस राज्य में सार्वजानिक क्षेत्र के कई प्रतिष्ठान अवस्थित है,जैसे:भारत अर्थ मूवर्स लि.,भारत हैवी इलेकट्रोनिक्स लि।  इलेकट्रोनिक उपकरणों के उत्पादन में कर्नाटक भारत में पहले स्थान पर है। इस राज्य को सोने के उत्पादन का भी गौरव प्राप्त है।  शिव समुद्रम,शरावती,काली नदी इत्यादि यहाँ की बिजली परियोजनाएं है। यह देश का पहला राज्य है,जिसने गोकेक प्रपात पर 1887 में पन बिजली का  उत्पादन किया था। 

परिवहन 
सड़कें : कर्नाटक में 215849 किमी लम्बी सड़कें है। इसमें 3843 किमी लम्बा राष्ट्रिय राजमार्ग शामिल है। 
रेलवे : यहाँ रेल लाइनों की लम्बाई 3089 किमी है। 
उड्डयन : राज्य में बंगलौर,बेलगाम ,मंगलोर और हुबली मुख्य हवाई अड्डे है। 
बंदरगाह : न्यू मंगलोर राज्य का प्रमुख बंदरगाह है।  इस बंदरगाह पर कुद्रेमुख लोह खान से निकले खनिज लोहा के निर्यात के लिए विशेष प्रबंध किया गया है। करवाड बंदरगाह का भी विकास किया जा रहा है और वहां भारतीय नौ सेना की सी बर्ड परियोजना पर काम चल रहा है। 
पर्यटन स्थल : राज्य के मुख्य आकर्षणों में सुन्दर पार्कों और उद्द्योगों का नगर बंगलौर,मैसूर का वृन्दावन गार्डन ,आदि है। टीपू सुल्तान की राजधानी श्रीरंगपट्टम में थी।  श्रवणबेलगोला स्थित 57 फुट ऊँची गोमतेश्वर(जैन ) की प्रसिध प्रतिमा पर्यटकों का मन मोह लेती है। बेलूर,हलेविड और सोमनथपुरा में विख्यात होयसल स्मारक है। बदामी,एहोल और पट्टादाकल जैसे स्थान चट्टानों को काटकर बनाए गए 1300 साल पुराने मंदिरों के लिए प्रसिद्ध हैं। हम्पी में खुला संगरहलय है तथा गुलबर्गा,बीदर और बीजापुर प्राचीन स्मारकों के लिए जाने जाते हैं। भारत का सबसे बड़ा जलप्रपात जोग मैसूर में है। 


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उड़ीसा: The soul of Incredible India

Thursday, 9 June 2016

उड़ीसा (The soul of Incredible India)

प्राचीन काल में उड़ीसा का नाम 
कलिंग था। महाकाव्यों में उड़ीसा 
को दंडकारण्य का एक भाग बताया गया है ,जिसे कलिंग,उत्कल और उद्र जैसे प्राचीन
नामों से  जाता है। तीसरी शताब्दी
ईस्वी पूर्व (261 ) में मौर्य सम्राट
अशोक ने कलिंग को जीतकर अपने साम्राज्य में मिला लिया।
दूसरी शताब्दी में उड़ीसा खारवेल के अधिकार में एक शक्तिशाली 
राज्य बना। चौथी शताब्दी में समुंद्रगुप्त ने वह के पांच राजाओ को हराकर उसे अपने प्रभाव में ले लिया। 610 ईस्वी में उड़ीसा शशांक के अधिकार में आया। शशांक की मृत्यु के बाद उड़ीसा पर कन्नौज के पुसयभूति वंशीय शासक हर्षवर्धन ने विजय प्राप्त की। सातवीं शताब्दी में उड़ीसा में स्वतंत्र गंग वंश के राजा हुए। इसी वंश का शासक,नर्सिंघ्वर्मन् कोणार्क में सूर्य मंदिर बनवाने के लिए विख्यात है। चौदहवीं शताब्दी से 1592 ईस्वी तक उड़ीसा पर पांच मुस्लमान राजाओ का राज्य रहा। मुगलों के शासन की महत्ता काम होने के बाद मराठों ने उड़ीसा पर अधिकार कर लिया। वे उस पर 1803 ईस्वी तक शासन करते रहे ,जब तक की अंग्रेजो ने उसे अपने अधिकार में ले लिया। ब्रिटिश काल में १ अप्रैल 1936 ईस्वी में उड़ीसा एक अलग प्रान्त कर दिया गया। 

भूगोल: उड़ीसा भारतीय प्रायद्वीप के उत्तर-पूर्वी तटीय भाग में स्थित है। इसके पूर्व में बंगाल की खाड़ी ,उत्तर में झारखण्ड,पश्चिम में छत्तीसगढ़ ,उत्तर -पूर्व में पश्चिम बंगाल और दक्षिण-पूर्व में आंध्र प्रदेश स्थित है। वर्तमान में बालासोर जिले में स्थित चांदीपुर प्रेक्षपस्त्र परिक्षण केंद्र देश के प्रमुख प्रेक्षेपण स्थल के रूप में विकसित हुआ है। 

अर्थव्वस्था: राज्य के 65% से अधिक लोग कृषि पर आश्रित है। कुल 87.89 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिचाई की सुविधा उपलब्द है। चावल,तिलहन,मूंगफली,दाल,जूट,गन्ना,नारियल,हल्दी आदि यहाँ की प्रमुख फसलें है। राज्य में वनों के अंतर्गत कुल वन क्षेत्र 48,855 वर्ग किमी है ,जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 31.38% है। 

परिवहन:
सड़कें: राज्य में प्रांतीय राजमार्गों की लम्बाई 3855 किमी ,राष्ट्रीय राजमार्गो की लम्बाई 3704 किमी एवं एक्सप्रेस राजमार्गो की लम्बाई २९ किमी है। 
रेलवे: राज्य में रेलमार्गो की कुल लम्बाई 2329 वर्ग किमी है। इसमें 2275 किमी लम्बी बड़ी रेल लाइने तथा 54 किमी छोटी लाइने है। 
उड्डयन: भुवनेश्वर में हवाई अड्डा स्थित है,जहां से नई दिल्ली,कोलकाता ,विशाखापत्तनम और हैदराबाद के लिए नियमित उड़ान होती है। 
  
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असम: The Land of Red Rivers and Blue Hills

Wednesday, 8 June 2016

असम 
असम संस्कृत भाषा शब्द 'असोमा' का पर्याय है जिसका अर्थ है -अद्वित्य। ऑस्ट्रिक, मंगोल, द्रविड़ और आर्य जैसी विभिन्न जातियों की शरणस्थली होने के कारण इस राज्य में मिश्रित संस्कृति का विकास हुआ। प्राचीन काल में असम प्रागज्योतिषपुर के नाम से प्रसिद्ध था। बाद में इसका नाम कामरूप पड़ गया। कामरूप राज्य का सबसे प्राचीन उल्लेख इलाहाबाद में स्थित समुद्रगुप्त के शिलालेख में मिलता है। चीन का विद्वान  यात्री हेनसांग  लगभग 743 ईस्वी  मैं राजा भास्कर वर्मन के निमंत्रण पर कामरूप आया था। यहां 1228 से 1826 तक पूर्वी पहाड़ियों पर आहोमो  का शासन कायम रहा। अंग्रेजों ने 1826 की यादंबु  संधि के तहत इसे अपने राज्य में मिला लिया। भारत के विभाजन के बाद मुस्लिम बहुल जिला सिलहट पूर्वी बंगाल (वर्तमान बांग्लादेश) में मिला दिया गया। असम को 'लैंड ऑफ द रेड रिवर एंड लुइस' के नाम से भी जाना जाता है। असम पूर्वोत्तर राज्यों का प्रवेश द्वार है। 

परिचय 
राजधानी:दिसपुर ;
क्षेत्रफल :78,438 वर्ग किमी ;
जिले :27 ;
जनसँख्या :31,169,272;
लिंगानुपात :954 :
जनसँख्या घनत्व :397  प्रति वर्ग किमी; 
वृद्वि दर (2001 -2011 ):16.93%;
साक्षरता :73.18%;
मुख्य भाषा :असमिया ;
विधानमंडल :एकसदनीय ;
विधान सभा सदस्य :126 ;
लोकसभा सदस्य :14 ;
राज्य सभा सदस्य :7 ; 
प्रति वयक्ति आय :27,197रु.।  
  
भूगोल :-असम के उत्तर में भूटान, तिब्बत और अरुणाचल प्रदेश, पूर्व में नागालैंड, म्यांमार  तथा मणिपुर, दक्षिण में मेघालय , त्रिपुरा तथा मिजोरम, पश्चिम में बांग्लादेश तथा पश्चिम बंगाल स्थित है। 

निवासी तथा अर्थव्यवस्था: लगभग 80% आबादी कृषि पर निर्भर है। राज्य में लगभग 39.83 लाख हेक्टेयर कुल खेती योग्य भूमि है। इसमें से करीब 27.24लाख  हेक्टेयर क्षेत्र में फसल उगाई जाती है। चावल यहां की मुख्य खाद्य फसल है। इस राज्य की मुख्य व्यापारिक फसलें पटसन,चाय,कपास,तिलहन, गन्ना, आलू आती है, जबकि राज्य की मुख्य बागवानी  फसलें है: संतरा, केला, अनान्नास,सुपारी, नारियल और अमरुद आदि। असम में कृषि पर आधारित उद्योगों में चाय का स्थान प्रमुख है। देश में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के कुल उत्पादन में इस राज्य का बड़ा हिस्सा है। 

सड़क :सड़कों की कुल लंबाई 37,515 किमी है। इसमें राष्ट्रीय राजमार्ग की लंबाई 2836 किमी  है। 

रेलवे: असम में कुल 2284 किलोमीटर लंबी रेल लाइन है। इनमें ब्रॉडगेज में 1227 किलोमीटर तथा मीटर गेज में 1057 किलोमीटर रेल लाइनें हैं। 

विमान सेवा: असम में छह विमान हवाई अड्डे हैं: गुवहाटी, तेजपुर, डिब्रुगढ़, लखीमपुर, सिलचर और जोरहाट। 

जल परिवहन :ब्रम्हपुत्र नदी असम में 700 किलोमीटर का परिवहन मार्ग बनाती है। राज्य अंतर्देशीय जल परिवहन निगम तथा केंद्रीय अंतर्देशीय जल परिवहन निगम जल परिवहन के यात्री और माल सेवाओं का संचालन करते हैं। 

त्योहार: 'बिहू' असम का मुख्य पर्व है। यह तीन प्रकार से मनाया जाता है। रंगाली बिहू या बोहाग बिहू खेती के मौसम के शुभारंभ का प्रतीक है। इससे नए वर्ष का शुभारंभ भी होता है।  भोगली बिहू,फसल की कटाई का त्यौहार है। कांगली बिहू,या कातीबिहु शरद ऋतू का एक मेला है। 

पर्यटन स्थल : कामाख्या मंदिर,उमानन्दा नवगृह मंदिर,वशिष्ट आश्रम ,गन्धिमण्डप ,राज्य संग्रहालय ,मदन कामदेव मंदिर ,शुक्रेश्वर मंदिर,गीता मंदिर आदि दर्शनीय स्थल है। काजीरंगा राष्ट्रीय पार्क ,मानस ,माजुली,हाजी ,बताद्र्वा, और सुयलकुची (रेशम उद्दोग ) जैसे दर्शनीय स्थल है।   
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अरुणाचल प्रदेश - The Land of Dawnlit Mountains

Tuesday, 7 June 2016

अरुणाचल प्रदेश 
अरुणाचल प्रदेश का आधुनिक इतिहास 24 फरवरी ,1826 को संपन्न हुई यदंबू संधि के बाद असम में ब्रिटिश सशन लागू होने से शुरू होता है। ब्रिटिश शासकों ने 1838 में असम (उस समय अरुणाचल प्रदेश असम का भाग था। ) को अपने राज्य में मिला लिया। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद यह (1962 से पहले )नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी (नेफा ) के नाम से जाना जाता था। 1972 में इसे केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया और इसका नाम अरुणाचल प्रदेश रखा गया। अंततः २० फरवरी,1987 को अरुणाचल प्रदेश को भारत के २४ वे राज्य के  पूर्ण राज्य का दर्जा दे दिया गया। यह राज्य गुह्वाटी उच्च न्यायालय के छेत्रधिकर में आता है। 

परिचय 
राजधानी :ईटानगर ,क्षेत्रफल :83,743 वर्ग किमी ;कुल जिले :16 ;जनसँख्या :1382611 ;लिंगानुपात:920 ;जनसँख्या घनत्व :17 ;वृद्धि दर (2001 -2011 ):25.92 %; साक्षरता :66.95 %;मुख्य भाषाऐ:मोनपा ,मीजी,अका,शरदकपेंन ,बांगनी ,अपतानी ,तगिन आदि ;विधानमंडल : एकसदनीय ; विधानसभा सदस्य : 40 ; लोकसभा सदस्य :2 ; राज्यसभा सदस्य:1 ;प्रतिवक्ति आय:51,644 रु. 

भौगोलिक परिचय : अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम में भूटान,उत्तर में चीन ,उत्तर -पूर्व में तिब्बत,पूर्व में म्यांमार (बर्मा)तथा दक्षिण में असम है। अरुणाचल प्रदेश की सीमा नागालैंड और असम से मिलती है। 
राज्य के अर्थव्यवस्था : अरुणाचल प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में अनेक जनजातीय बसी हुई हैं जिनमें प्रमुख है : वांगचू,गेलौंग ,मिनयोंग ,मिशमी,इटु ,तांगसा और दिगरु। 13 जिला शहरों को छोड़कर बाकी राज्य का पूरा इलाका ग्रामीण है। कृषि यह के लोगो का प्रमुख वयवसाय है। यहाँ की अर्थव्वस्था ,जो मुखयतः 'झूम ' की खेती पर आधारित थी , में धीरे धीरे परिवर्तन आने लगा है। चावल यहाँ  की मुख्य  फसल है। अरुणाचल प्रदेश में वनों , खनिजों तथा पनबिजली संसाधनों का विपुल भंडार है। ईटानगर में उत्तर -पूर्वी क्षेत्रीय टेक्नोलॉजी संसथान स्थापित किया गया है। 
परिवहन : इस राज्य में 392 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग है। अलोंग ,दयोरिजो ,पासीघाट ,तेजू और जीरो में वायुदूत सेवाएं उपलब्ध है। 
त्यौहार :लोसरखान ,नयोकम ,सीदोना ,अरण ,संगकेन ,रेह ,आराह ,लोकू ,ओमजिले और मोल यहाँ  के प्रमुख त्यौहार है। 
पर्यटन स्थल : बोमडिला ,तवांग और उसके निकट स्थित भारत का विशालतम बौद्ध विहार तथा ईटानगर का ऐतिहासिक ईटा महल तथा गंगा झील दर्शनीय स्थल है।  
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